परीक्षा के तनाव से छुटकारा कैसे पायें

डॉ संजय श्रीवास्तव   दोस्तों अब हमारे बच्चों की परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं और विद्यार्थियों के साथ साथ उनके माता पिता एवं शिक्षकगण भी बहुत तनाव महसूस कर रहे होंगे |दोस्तों आप सभी परीक्षा के कारण उत्पन्न होने वाले तनाव तथा उस तनाव के कारण होने वाली असफलता के चलते बाद में या परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों द्वारा की नादानियों की वजह से  विद्यार्थी या उसकी वजह से पूरे परिवार को मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा से गुजरना पड़ता है एवं उस उससे जो भी क्षति होती है | उससे तो…

Read More

चोट के कारण को पहचाने नयी चोट को पुरानी न होने दे

डॉ. नौशीन अली, ब्यूरो चीफ-ICN मध्य प्रदेश  ‘गिरना संभलना फिर उठकर खड़े हो जाना कभी हिम्मत न हारना’’ भोपाल। आज कल की इस भाग–दौड़ भरी लाइफ में इंसान इतना व्यस्त हो गया है, कि उसे अपनी सेहत की परवाह किये बिना ही बस दौड़े जा रहा है। इस भाग–दौड़ में उसको चोट भी लग जाती है या खेलते वक़्त जिसे हम  स्पोर्ट्स  इंजरी  कहते है पर वो उसको नजरअंदाज़ कर देता हैहमें ऐसी चोटों को नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए। कई बार ऐसी चोटे बड़ा रूप ले लेती है। चोट या  इंजरी सिर्फ जवान को नहीं बच्चे  बूड़ो को भी लग जाती है सबके अपने अलग कारण होते है। चोट का लगना मौसम पर भी निर्भर करता है क्योंकि जब चोट लगती है तो खून निकलता है चुकी गर्मी के मौसम में आर्टेरिअल वासोडाईलेटेशन (धमनी (फैलना)– गर्मी के कारण होता है तो ब्लड पी.एच.में भी बदलाव देखा जाता है खून में बदलाव की वजह से जब गर्मी के मौसम में चोटलगती है तो खून ज़्यादा निकलता है। इसी के उल्टा ठण्ड का मौसम है  उसमें  वासोकॉन्सट्रिक्शन (धमनी सिकुड़ना) होता है तो खून कम निकलता है हमको जो चोट लगी है उसकीपूरी जानकारी होनी चाहिए कई बार लोग चोट को मसाज करवा कर उसको खुद ही गंभीर  बना लेते है जबकि कभी भी चोट को मलवाना नहींचाहिए अगर कभी जब चोट लग जाये उसमे सूजन आने लगे पर दर्द न हो तो डरने की कोई ज़रुरत नहीं है। एक्यूट इंजरी— इसके जो लक्षण आते है अचानक से दर्द करराहट जो ज़्यादातर खेलते वक़्त या गिर जाने से आदि अचानक गतिविधियों से होता है जो दर्द मासपेशियो और टेंडन में होता है। चोट लगे…

Read More

दवा खाने से बीमारी के लक्षण कुछ दिन रुकेंगे,खत्म नहीं होंगे

डॉ सौम्य प्रकाश, मेडिकल कोरेस्पोंडेंट-ICN आज कल के व्यस्त दिनचर्या में आम लोगों के पास अपनी बीमारी के लिए भी वक्त नहीं।ना वो खुद बल्कि अपने परिवाजनों और मित्रो को भी दवा दे देंगे या बता देंगे। बिना चिकित्सक के सलाह के दवा लेने से लोगों में बीमारी के लक्षण कुछ वक्त के लिए रुक जाते हैं,या तत्काल आराम मिल जाता हैं।पर वो बीमारी समुल नाश नहीं होती।कोई भी चिकित्सक वो दंत चिकित्सक हो,या कोई सामान्य चिकित्सक वो कोई भी दवा आपको ,आपकी पूरी बीमारी की जानकारी के अनुसार आपके…

Read More

मनी सिरीज–(6)

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप अमीरी का फीता आपका इस दूसरे पड़ाव पर स्वागत है । आपका पहले पड़ाव को पार कर दूसरे पड़ाव की और बढ़ना ही यह संकेत करने के लिए पर्याप्त है कि आप अपने जीवन को नए प्रकाश, नए सुगंध और नयी ऊर्जा से भरने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो चुके हैं।  किन्तु आगे बढ़ने से पूर्व मैं आपसे एक प्रश्न अवश्य करूँगा – क्या आपने इस माह का प्रथम भुगतान स्वयं को कर दिया है ? यदि नहीं तो आगे बढ़ने से…

Read More

गौप्टा © द्वारा उत्कृष्टता – भाग 5 (आपका समय आखिर जाता कहां है)

डॉ. संजय कुमार अग्रवाल, सीनियर एसोसिएट एडिटर, आई.सी.एन. ग्रुप  [पिछले लेख में हमने देखा कि 24 घंटे का दिन भगवान का निर्णय है। आज हम जानेंगे कि आपका समय आखिर जाता कहां है।]  आपका समय आखिर जाता कहां है (Time Log) आप अक्सर यह सोचते होंगे कि आपका समय आखिर कहाँ उड़ जाता है क्योंकि आप हमेशा व्यस्त रहते हैं और कभी कभी महत्वपूर्ण कामों के लिए भी समय नहीं निकाल पाते। क्योंकि हम सब अलग-अलग तरीके से अपने समय का उपयोग करते हैं, पहले आपको कम से कम एक…

Read More

पहाड़ का पानी और जवानी दोनों पहाड़ के काम नहीआती!

अमित पांडेय, एसोसिएट एडिटर, ICN उत्तराखंड हल्द्वानी। पहाड़ी का जीवन आसान नही होता। ये कहावत बहुत कुछ कह जाती है। पहाड़ में रह कर ही वहाँ के दर्द समझ मे आते है क्योंकि पहाड़ियों की दिनचर्या ही संघर्ष से शुरू होती है जो सुविधाएं शहरों में आम होती है उनके लिए भी एक पहाड़ी को अच्छा संघर्ष करना पड़ता है। जैसे कि पीने का पानी। हैंडपम्प हो या नौला ( पानी का प्राकर्तिक श्रोत ) इससे पानी भर कर पैदल ही घर तक पहुँचाने का दर्द और सकून। ये दोनों…

Read More