पहाड़ का पानी और जवानी दोनों पहाड़ के काम नहीआती!

अमित पांडेय, एसोसिएट एडिटर, ICN उत्तराखंड

हल्द्वानी। पहाड़ी का जीवन आसान नही होता। ये कहावत बहुत कुछ कह जाती है। पहाड़ में रह कर ही वहाँ के दर्द समझ मे आते है क्योंकि पहाड़ियों की दिनचर्या ही संघर्ष से शुरू होती है जो सुविधाएं शहरों में आम होती है उनके लिए भी एक पहाड़ी को अच्छा संघर्ष करना पड़ता है। जैसे कि पीने का पानी। हैंडपम्प हो या नौला ( पानी का प्राकर्तिक श्रोत ) इससे पानी भर कर पैदल ही घर तक पहुँचाने का दर्द और सकून। ये दोनों समझना जरूरी है। जहाँ एक तरफ थकान का दर्द होता है तो वही सकून होता है कि शुद्ध और मीठा पानी आपके पास है।अगर आप सामान्य परिवार से है तो घर की बनावट आपको शहरी सुखों से वंचित ही रखती है। पहाड़ में कई जगह पीने के पानी की समस्या बहुत पुरानी है ये लोगो की दिनचर्या में होता है कि पीने का पानी या तो नौले से या फिर हैंडपम्प से भर कर घर तक लाया जाए और अगर मेहमान आ गए तो पानी और ज्यादा चाहिए।

फ़ोटो रानीखेत के पास जालली गांव की है।

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