हाउडी मोदी कार्यक्रम से दुनिया भर में बढ़ी भारत की साख

राणा अवधूत कुमार, डिप्टी ब्यूरो चीफ, आईसीएन बिहार 
पटना। अमेरिका के ह्यूस्टन में रविवार की रात भारत और अमेरिकी नागरिकों के समूह द्वारा आयोजित हाउडी मोदी कार्यक्रम से दुनिया भर में भारत की साख बढ़ी है। अमेरिका के टैक्सास राज्य के ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री के साथ मंच को साझा कर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मोदी के साथ अपने मजबूत रिश्तों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया। मोदी कहते भी रहे हैं कि ट्रंप से उनके सिर्फ राजनैतिक ही नहीं बल्कि नियर-डियर संबंध हैं। अमेरिका में हुए इस कार्यक्रम में मोदी-मोदी के नारों के बीच भारतवंशियों के अपने पीएम के प्रति आकर्षण देखकर ट्रंप खुद काफी देर तक हैरत में रहे। अपने ही देश में, अपने घर में खुद से ज्यादा किसी और देश के राष्ट्राध्यक्ष के प्रति इतना सम्मान ट्रंप के लिए कोई अजूबा से कम नहीं था। हालांकि दो घंटे के कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार एक-दूसरे को काफी नजदीकी मित्र व महान नेता बताते रहे। नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के कार्यकाल को अमेरिका के इतिहास में निर्णायक बताया तो ट्रंप ने मोदी को सर्वोत्तम प्रधानमंत्री बताया, जिसकी भारत को अभी सख्त जरूरत है। करीब तीन घंटे तक चले इस कार्यक्रम में मोदी-मोदी के नारे से टैक्सास की धरती गुंजायमान होती रही। 50 हजार दर्शकों की क्षमता वाले इस स्टेडियम में सात हजार से अधिक बार मोदी-मोदी के नारे लगे। अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के बीच मोदी-ट्रंप की युगलबंदी ने विश्व रंगमंच व वैश्विक राजनीति को एक नई दिशा देगी, इसकी संभावना विश्व के तमाम राजनैतिक विश्लेषक लगा रहे हैं। भारत व अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मोड़ देख रहे हैं। हालांकि कई लोग इसे अमेरिका में अगले साल होने वाले चुनाव को लेकर भी जोड़ रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप जहां अमेरिकी-भारतवंशियों को रिझाने के लिए इस मंच का प्रयोग करने में पीछे नहीं रहे। वहीं नरेंद्र मोदी ने हाल ही में हुए भारत में संपन्न हुए आम चुनावों में भाजपा ने अबकी बार मोदी सरकार का नारा दिया था। वहीं अमेरिका में इसे नए सिरे से नामकरण करते हुए मोदी ने फिर एक बार ट्रंप सरकार का नारा देते हुए भारतवंशियों से उनके सहयोग व चुनाव में समर्थन की अपील भी की।
हाउडी मोदी का अर्थ व इसका प्रभाव
‘हाउडी मोदी’ मतलब मोदी का सत्कार स्थानीय भाषा में हाउडी से अभिप्राय अंग्रेजी के वाक्य ‘हाउ डू यू डू’ यानि कि आप कैसे हैं? से है। आम तौर पर अमेरिकन समुदाय में ‘हाउडी’ स्लैंग का प्रयोग किसी व्यक्ति विशेष का सत्कार करने के रूप में करते हैं। इसी भाव से जोड़ते हुए कार्यक्रम का नाम ‘हाउडी मोदी’ रखा गया है। जहां भारत के प्रधानमंत्री के सम्मान व सत्कार में अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश की जनता व स्वयं ताकतवर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उनके स्वागत व अगुवाई के लिए पलके-पावड़े बिछा कर बैठे रहे। यहीं नहीं मोदी के सम्मान में हो रहे कार्यक्रम में डोनाल्ड ट्रंप की इंट्री बाद में हुई। जहां पूरे कार्यक्रम के दौरान ट्रंप मोदी की मनमोहक भाषण व आर्कषक अंदाज के मुरीद बने रहे। हाउडी मोदी कार्यक्रम में जिस तरह से अमेरिका में रहने वाले 50 हजार भारतवंशियों ने अपने प्रधानमंत्री के सम्मान में जज्बा दिखाया वह आने वाले दिनों में ऐतिहासिक होगा। इतिहास के साक्षी बने नरेंद्र मोदी ने दिखा दिया कि उनका जलवा सिर्फ हिन्दुस्तान में ही नहीं बल्कि अमेरिका में भी सर चढ़ कर बोल रहा है।
इसलिए टैक्सास में हुआ आयोजन
टैक्सास इंडियन फोरम द्वारा आयोजित किए जा रहे हाउडी मोदी आयोजन के पीछे की एक रणनीतिक वजह यहां प्राकृतिक गैस व तेल कंपनियां का स्थापित होना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस कार्यक्रम के जरिए प्रधानमंत्री मोदी प्राकृतिक ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय रिश्ता मजबूत करना चाहते हैं। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच तेल व गैस खरीद-फरोख्त का रिश्ता भी मजबूत हुआ है। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध से भारत अब अमेरिका से ज्यादा तेल खरीद रहा है। दूसरी ओर, व्यापार युद्ध के कारण चीन अब अमेरिकी तेल नहीं ले रहा। जिस कारण भारत अमेरिका के लिए एक बड़ा व आवश्यक बाजार है। टैक्सास के ह्यूस्टन में हाउडी मोदी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एनआरजी स्टेडियम पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। यहां डेमोक्रेट स्टेनी होयर ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया और अपने भाषण में महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकियों और भारतीय दोनों का मकसद एक है, दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ाने का। यूएस हाउस ऑफ रेप्रेजेंटेटिव के मैजोरिटी लीडर स्टेनी एच होएर ने कहा कि अमेरिका की तरह भारत ने अपनी प्राचीन परंपराओं को गांधी के सबक और नेहरू के विजन के जरिये खुद को एक सुरक्षित लोकतंत्र बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश हैं जहां बहुलतावाद और प्रत्येक भारतीय के मानवाधिकार सुरक्षित हैं। अमेरिकी नेता ने जवाहरलाल नेहरू के भारत की आजादी के समय के मध्य रात्रि के भाषण को भी याद किया। उन्होंने महात्मा गांधी के हर आंख के आंसू पोछने की बात का भी उल्लेख किया। गांधी ने कहा था कि जब तक लोगों की आंख में आंसू हैं और वे दुखी हैं तब तक हमारा काम पूरा नहीं हुआ है। एक तरफ जहां अमेरिका में नेहरू भारत की प्राचीन परंपरा को सहेजने को लेकर याद किए जा रहे थे वहीं देश में नेहरू के पाक अधिकृत कश्मीर के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। पीएम ने कहा कि यदि नेहरु ने बेवक्त पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम की घोषणा नहीं की होती, तो ‘पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर’ यानि पीओके अस्तित्व में नहीं आता। कई वरीय पत्रकारों व आलोचकों ने कहा कि भले ही कुछ भारतीय भूल गए हों लेकिन यह देखकर अच्छा लगा कि अमेरिकी संवैधानिक लोकतंत्र में नेहरू व गांधी जी के योगदान को लोग नहीं भूले। ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में अमेरिका में बसे 50 हज़ार भारतीयों और कई अमेरीकी सांसदों, सेनेटरों, गवर्नरों, मेयरों और कारोबारियों के सामने हुए हाउडी मोदी के मेगा शो को लेकर पूरे विश्व में चर्चा हो रही है। यहीं नहीं वैश्विक स्तर पर रविवार को टेलीविजन पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाला शो बना। कार्यक्रम की टैगलाइन थी “साझा स्वप्न, सुनहरा भविष्य”। यह किसी रॉक कंसर्ट से कम नहीं था। वहां लोगों का हुजूम था, चमक-दमक थी, संगीत था, नृत्य था नारेबाज़ी मोदी-मोदी।  ये एक ऐसा शो था जिसे देख शायद ख़ुद ज़बरदस्त शोमैन समझे जाने वाले पूर्व टीवी होस्ट डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय फ़िल्मी सितारों अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ ख़ान औऱ सलमान ख़ान को भी जलन होती होगी। इस आयोजन में साफ़ दिखा कि अमेरिका में बसे भारतीय समुदाय के लोगों में मोदी का चुंबकीय असर है। यह समुदाय एक तरफ तो अमरीका के संपन्न समुदायों में एक है। जिसके पास वित्तीय, राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर संसाधनों की कमी नहीं है। जो अमेरिकी संसदीय चुनाव को सीधे प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। गौरतलब है कि अमेरिका में करीब 40 लाख भारतीय मूल के नागरिक हैं। जिनमें करीब 16 लाख से अधिक लोगों को अमेरिकी चुनाव में मताधिकार करने का प्रावधान है। इस कार्यक्रम में अमेरिका में रह रहे भारतीयों का एक बड़ा समूह आने वाले दिनों में राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। जो शायद ट्रंप के लिए फायदेमेंद साबित हो सके।  वहीं दूसरी ओर यह अपने भारतीय जड़ों यानी धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक रूप से बेहद गहरे ढंग से जुड़ा हुआ है. यह समुदाय भारतीय योग से लेकर भारतीय नृत्य और फ़िल्म संगीत को भी अपने भीतर समाहित कर लेना चाहता है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस समुदाय को अपनी भारतीयता पर गर्व है. इन सबके बावजूद मोदी का जिस गर्माहट और उत्साह से स्वागत किया गया वह अविश्वसनीय रहा. मगर जब पर्दा गिरा, चमकती बत्तियाँ बंद हो गईं, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि ‘हाउडी मोदी’ का असल विजेता कौन है – ट्रंप या मोदी? दोनों ही नेता, जो इतने अलग होकर भी एक जैसे हैं, वे इस साझा मंच से कई उद्देश्यों को साधने की कोशिश कर रहे थे – अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अपना क़द ऊँचा करना, अपने समर्थकों में अपनी दमदार पहचान को मज़बूती से पेश करना, प्रतिद्वंद्वी देशों को संदेश देना, चुनावी फ़ायदे के लिए राजनीतिक पकड़ बनाना, द्विपक्षीय संबंधों में व्यापार, कारोबार, रक्षा और निवेश से जुड़े मुद्दों पर समझ बढ़ाना और चीन, रूस, अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर अच्छे समझौतों के लिए माहौल बनाना और आतंकवाद पर लगाम लगाना। मोदी के ह्यूस्टन के ऊर्जा सेक्टर में की गई पहली बातचीत से पेट्रोनेट लिक्विड नेचुरल गैस (एलएनजी) का अमरीकी बेहेमोथ- टेल्यूरियन इंक से समझौता हुआ है जिसके तहत पेट्रोनेट हर साल अमरीकी कंपनी से पांच मिलियन टन एलएनजी आयात करेगी. इस एक समझौते ने ही व्यापार असंतुलन को लेकर ट्रंप की घबराहट को काफ़ी हद तक कम कर दिया होगा। नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रविवार को अमरीका के टेक्सस राज्य के ह्यूस्टन में आयोजित ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में हिस्सा लेेेकर कई मायने में इतिहास रच दिया।
नरेंद्र मोदी ने ‘हाउडी मोदी’ का जवाब देते हुए कहा कि भारत में सब अच्छा है. प्रधानमंत्री ने आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी करने को भी बड़ा क़दम बताया. उन्होंने नाम लिए बिना पाकिस्तान का भी ज़िक्र किया.
उधर ट्रंप ने कहा है कि भारत और अमरीका ‘कट्टर इस्लामी आतंकवाद’ से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत डोनल्ड ट्रंप की तारीफ़ के साथ की. उन्होंने कहा, “हमारे साथ बहुत ख़ास व्यक्ति मौजूद हैं. वह किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. दुनिया का हर शख़्स उनके बारे में जानता है. इस महान देश के सबसे ऊंचे पद पर बैठने से पहले ही हर कोई उनसे परिचित था. उनका यहां स्वागत करना. मेरे लिए ही नहीं बल्कि अमेरिका के सम्मान का विषय है.
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