पटना में करीब डेढ़ लाख से ऊपर अभी लोग बाढ़ में फंसे

राणा अवधूत कुमार, डिप्टी ब्यूरो चीफ, आईसीएन बिहार 
पटना। चार दिनों से लगातार हो रही आफत की बारिश राजधानी पटना समेत पूरे सूबे पर कहर बनकर टूटा है। जनजीवन ठहर सा गया है। उत्तर बिहार, पूर्व बिहार समेत राज्य के हर क्षेत्र में हो रही तेज बारिश से स्थिति हर क्षण विकट होती जा रही है। हालांकि कल से बारिश बंद है लेकिन जलजमाव से समस्या का समाधान होने में कम से कम हफ़्तों लगेंगे। अब तक अलग-अलग जगहों पर हुई घटनाओं में 24 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें पटना में सात मौतें हुई हैं। इनमें भागलपुर में 12 और अन्य जिलों में पांच जानें गई हैं। हालत यह है कि राज्य की बड़ी से ज्यादा उफान छोटी नदियों में है। छोटी नदियां तीन दर्जन स्थानों पर लाल निशान से ऊपर बह रही हैं। वहीं, गंगा के घटने का रफ्तार तो थमा है, लेकिन, पुनपुन और सोन उफना गईं हैं। पटना में स्थिति और भी भयावह है। पटना में जलप्रलय जैसे हालात हैं, जिसकी वजह से लोग पानी पीने को तरसते दिखे।

पटना में जलप्रलय के हालात
झील में तब्दील हो चुके पटना में जलप्रलय की स्थिति है। सड़कों पर पांच से छह फुट तक पानी जमा हो गया है। बिजली, पानी, दूध और गैस की आपूर्ति ठप होने से हाहाकार जैसी स्थिति है। सबसे बुरे हालत राजेंद्र नगर, कंकड़बाग, पाटलिपुत्र इलाकों की है। यहां के लोग तीन दिनों से घरों में फंसे हैं। एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीम फंसे हुए लोगों को निकालने में जुटी हुई है। दर्जनों परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है। बारिश के कारण मगध विश्वविद्यालय की स्नातक तृतीय वर्ष और पाटलिपुत्रा विवि की बीएड की परीक्षाएं रद्द कर दी गई है। वहीं, पटना के स्कूलों में अगले आदेश तक छुट्टी कर दी गई है। पटना, गया, भागलपुर और पूर्णिया सहित पूरे राज्य में अगले चौबीस घंटे तक जोरों की बारिश का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने चार अक्तूबर तक रुक-रुककर बारिश होने का अनुमान जताया है। पिछले 36 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश रोसड़ा में 290 मिमी हुई है।

इन जिलों में 24 घंटे के लिए रेड अलर्ट
मुजफ्फरपुर, दरभंगा, वैशाली, समस्तीपुर, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा, भोजपुर, जहानाबाद, अरवल, पटना, नालंदा, शेखपुरा, बेगूसराय, बांका, लखीसराय, कटिहार, भागलपुर,  मुंगेर, खगड़िया, शिवहर में अगले 24 घंटे के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि भारी बारिश के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को सरदार पटेल भवन में आपदा प्रबंधन विभाग स्थित अपने कक्ष में राज्य में मूसलाधार बारिश से उत्पन्न स्थिति पर उच्चस्तरीय बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोग निरंतर काम कर रहे हैं। लोगों को जगहों से निकालना, पीने के पानी का इंतजाम, दूध की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये अलग-अलग जगहों पर इंतजाम कराया जा रहा है। जाते-जाते मानसून ने बिहार के लोगों को आफत में डाल दिया है। नदियों में उफान के कारण जगह-जगह तटबंध दबाव से दरक रहे हैं। पटना की बात करें तो शुक्रवार देर रात से शुरू हुई मूसलधार बारिश से 1975 की बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के अलर्ट के बाद बारिश से निपटने के प्रशासनिक इंतजाम नाकाफी साबित हुए हैं। पटना के कुछ मोहल्लों में छह फीट तक पानी बह रहा है। इधर, पटना समेत राज्य के अधिसंख्य जिलों में अगले 48 घंटे तक भारी बारिश का नया अलर्ट जारी किया गया है। इससे स्थिति और गंभीर होने की आशंका है। भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया, पूर्णिया समेत तमाम जिला मुख्यालयों में जल भराव से लोग परेशान हैं।

मुख्‍यमंत्री ने की संयम बनाए रखने की अपील
बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए रविवार की दोपहर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाई लेवल मीटिंग कर स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद उन्‍होंने कहा कि पीड़ितों को सभी आवश्यक चीजें मुहैया कराई जाएंगी। लोगों को परेशानी न हो इसके लिए अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने लोगों से संयम व साहस बनाए रखने की अपील की। कहा कि हर संभव मदद की जाएगी। पिछले एक हफ्ते में हुई बारिश ने राजधानी को झील में बदल दिया है। घर, दुकान, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे सब जलमग्न हो गए हैं। राजेंद्रनगर, कंकड़बाग, लंगर टोली, बहादुरपुर, पाटलिपुत्र कॉलोनी, राजीवनगर, गर्दनीबाग, सरिस्ताबाद, चांदमारी रोड, पोस्टल पार्क, इंदिरानगर, संजय नगर, अशोक नगर, रामकृष्णानगर, संदलपुर, श्रीकृष्णापुरी आदि इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं। राजेंद्रनगर में छह फीट जलजमाव है। यहां जिला प्रशासन की ओर से नावें चलाई जा रही हैं। चूड़ा-गुड़ बांटा जा रहा है। पटना में फिलहाल स्कूल-कोचिंग बंद करने का निर्देश दिया गया है। पटना विश्वविद्यालय और पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में होने वाली परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं हैं। पटना मेडिकल कॉलेज व अस्‍पताल (पीएमसीएच) व नालंदा मेडिकल कौलेज व अस्‍पताल (एनएमसीएच) में बारिश का पानी वार्ड तक में घुस गया है। पानी के कारण इन अस्‍पतालों में मरीज परेशान हैं। कई ऑपरेशन भी टालने पड़े हैं।
टूट रहे बांध, उफनाने लगीं नदियां
भारी बारिश से छपरा जिले के जलालपुर प्रखंड में सोंधी नदी के पानी के दबाव से लंगड़ी बांध टूट गया। वहीं गोपालगंज में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। सिवान में सरयू में पानी काफी बढ़ गया है। बक्सर में गंगा उफान पर है। कोसी-सीमांचल में पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश के कारण आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सुपौल में कई सरकारी कार्यालय भी जलजमाव की चपेट में हैं। मधेपुरा में कोसी का जलस्तर बढ़ा, चौसा व आलमनगर के करीब दो दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। किशनगंज में बंगाल द्वारा महानंदा व डोक बराज से पानी छोड़े जाने से महानंदा नदी के जलस्तर में आंशिक वृद्धि हुई है। कटिहार में गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि से बाढ़ की स्थिति विकराल बनी हुई है।
अमवा खास तटबंध पर कैंप कर रहे अभियंता
उत्तर बिहार में मिट्टी धंसने से दरभंगा-समस्तीपुर रेलखंड पर चार घंटे तक परिचालन बाधित रहा। नदियों में उफान से मधुबनी के लदनियां और मुजफ्फरपुर के कटरा प्रखंड क्षेत्र में फिर बाढ़ का पानी फैलने लगा है। पश्चिम चंपारण में गंडक समेत अन्य पहाड़ी नदियों के जलस्तर में वृद्धि जारी रही। गंडक के कटाव से ठकराहां प्रखंड क्षेत्र स्थित अमवा खास तटबंध 100 मीटर के दायरे में क्षतिग्रस्त हो गया है। लक्ष्मीपुर के पास कटाव नियंत्रित कर लिया गया है। लेकिन, गंडक का रुख अब भी आक्रामक है। राज्य सरकार के आदेश पर बाढ़ एक्सपर्ट ई. अब्दुल हमीद अभियंताओं की टीम के साथ कैंप कर रहे हैं। भय से लोग रतजगा कर रहे हैं। मधुबनी जिले में कमला और धौस नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी रही। शहर को टापू में बदल दिया है। कमला बलान खतरे के निशान से ऊपर है। समस्तीपुर में कई सरकारी कार्यालयों में बारिश का पानी घुस गया है। सीतामढ़ी में बागमती और अधवारा समूह की नदियों का जलस्तर बढ़ा है। शिवहर में बागमती तटबंध के आसपास के लोग रतजगा कर रहे हैं। दरभंगा का विश्वविद्यालय परिसर झील में तब्दील हो गया है।
गया में परेशानी झेलते रहे पिंडदानी
पितृपक्ष की शुरुआत चटख धूप से हुई थी, लेकिन आखिरी के दो दिन में बारिश ने सब कुछ धो कर रख दिया।  फल्गु में बाढ़ सरीखी स्थिति बन गई। पिंडदानियों को काफी परेशानी हुई। नवादा में डायवर्सन के बह जाने से गया से संपर्क बाधित हो गया। गया-धनबाद रेलखंड पर दिलवा स्टेशन के पास चट्टान गिरने से डाउन लाइन पर रेल परिचालन ठप है। सासाराम से होकर जाने वाली तीन जोड़ी ट्रेनें पहले ही रद की जा चुकी हैं। सर्वाधिक बारिश वैशाली के जंदाहा और नवादा के रजौली में हुई है. भारतीय मौसम विज्ञान के अनुसार विगत 24 घंटे (शनिवार को दोपहर 12 बजे तक) के दौरान सबसे अधिक बारिश 200 मिलीमीटर वैशाली के जंदाहा और नवादा जिले के रजौली में हुई है। भारी बारिश के कारण पूर्व मध्य रेलवे को 13 एक्सप्रेस और एक दर्जन पैसेंजर ट्रेन रद्द करनी पड़ी। वहीं, एक दर्जन को डायवर्ट करना पड़ा।  पटना एयरपोर्ट से दो विमानों को रविवार शाम डायवर्ट करना पड़ा। गो एयर की मुंबई पटना फ्लाइट खराब मौसम के कारण लखनऊ के लिए डायवर्ट की गई। वहीं, शाम पांच बजकर 25 मिनट पर स्पाइस जेट की दिल्ली पटना फ्लाइट बनारस के लिए डायवर्ट की गई। पटना एयरपोर्ट पर लो विजिबिलिटी की स्थिति बनी हुई है।
पटना में बारिश रुकने के बाद राहत और बचाव कार्य भी तेज हो गया है। जलजमाव वाले इलाकों के लोगों को राहत देने के लिए प्रशासन ने छह और जगहों पर राहत शिविर बनाए हैं। अब कुल 12 जगहों पर राहत शिविर चल रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि अब तक 37 हजार से अधिक लोगों को राहत शिविर में लाया जा चुका है। नेशनल क्राइसिस मैनेजमेंट कमिटी ने मंगलवार को कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गौबा की अध्यक्षता में एक बैठक कर पटना के हालात का जायता लिया। बिहार में राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की कुल 22 टीमें तैनात की गई हैं, जिसमें से 6 टीमें पटना में लगाई गई हैं। भारतीय वायुसेना के दो हेलीकॉप्टर्स लोगों को रेस्क्यू करने के अलावा उनतक खाने पीने की चीजें पहुंचा रहे हैं।
पटना में मशीन से पानी हटाया जा रहा
पटना में मशीनों का इस्तेमाल कर पानी को पंप किया जा रहा है। राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राज्य सरकार की टीमें पीने का पानी और खाद्य सामग्री वितरित कर रही हैं और बिजली सप्लाई को ठीक करने का काम तेजी से किया जा रहा है। पटना में जिन स्थलों पर शिविर संचालित हो रहे हैं, उनमें राजेंद्रनगर स्थित धनुष ब्रिज, दिनकर गोलंबर, कंकडबाग सांईं मंदिर, एसके पुरी, एनएमसीएच पटना सिटी, पत्रकारनगर सह हनुमाननगर, वैशाली गोलंबर, भूतनाथ रोड, कांटी फैक्ट्री, मलाही पकड़ी, पाटलिपुत्र गोलंबर, राजीवनगर, शिवपुरी, पटेलनगर तथा फ्रेंड्स कॉलोनी शामिल हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने आपदा राहत कार्य के लिए 12 और नए पदाधिकारियों को तैनात किया है।
पानी के 25 हजार पैकेट वितरित हुए
अभी तक 27 सौ फूड पैकेट तैयार कर पीड़ितों परिवारों को वितरित किया गया। प्रशासन ने हर शिविर के लिए एक नोडल अधिकारी की तैनात किया है, पर शिकायत है कि अधिकतर अफसर या तो अपना फोन बंद रखे हैं या उठा नहीं रहे हैं। यहां तक कि अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन और जिला कंट्रोल रूम के प्रभारी भी लोगों के फोन नहीं उठा रहे हैं, जिससे लोग समस्या दर्ज करा सकें। जिला कंट्रोल रूम में भी कई बार फोन करने पर रिस्पांस मिल रहा है। प्रशासन का कहना है कि अब तक 25 हजार पीड़ितों को पानी का पाउच एवं बोतल वितरित की जा चुकी है। बच्चों को पांच हजार पैकेट दूध भी दिया गया है।
कम्युनिटी किचेन भी शुरू किया गया
पीएचईडी द्वारा 60 वाटर टैंकर की व्यवस्था की गई है, जहां लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। डीएम ने बताया कि बाढ़ राहत कार्य में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 35 मोटर बोट के साथ 75 ट्रैक्टर एवं 10 बसों की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने महाराणा प्रताप भवन, दिनकर गोलंबर एवं कॉमर्स कॉलेज में कम्युनिटी किचेन शुरू किया है। किचेन से लोगों को भोजन से संबंधित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। इसके अलावा जकनीमोड़, पाटलिपुत्र गोलंबर, जगनपुरा और कॉलेज आफ कॉमर्स परिसर मुफ्त लिट्टी-चोखा की व्यवस्था की गई है।
बिहार के कई इलाकों में भारी बारिश का कहर देखने को मिल रहा है. इस वजह से कैमूर में दो और पटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है. राजधानी पटना समेत अन्य कई जिलों में जलजमाव ने आम जन जीवन पर बुरा असर डाला है. दो दिनों तक स्कूल बंद कर दिए गए हैं वहीं ट्रेनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लग गया है. पटना की बात करें तो यहां कई इलाकों में घरों में पानी घुस गया है. प्रशासन ने राहत व बचाव के लिए पटना की सड़कों पर दस ट्रक भी उतार दिए हैं जो लोगों को निचले इलाकों से बाहर निकाल रहा है. राजधानी में हो रही लगातार बारिश से लोग घरों में रहने को मजबूर हैं तो वहीं सड़कों पर आवागमन भी लगभग ठप पर गया है.
निचले इलाकों से बाहर निकाले जा रहे लोग
राजधानी पटना के कई  निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं. भारी जलजमाव के कारण लोगों को उन इलाकों से बाहर निकाला जा रहा है. प्रशासन ने इसके लिए पटना की सड़कों पर 10 ट्रक भी उतारे हैं जो उन इलाकों से लोगों को बाहर निकाल रहे हैं. उनके रहने के लिए पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल प्रांगण में राहत कैम्प बनाए गए हैं.
राजधानी के कदमकुआं थाना क्षेत्र के काली मंदिर के पास एक किशोर की मौत करंट लगने से हो गई. बताया जा रहा है कि भारी बारिश के कारण जलमग्न हुए इलाके में ग्रिल में करंट आ गया था जिस कारण उसकी मौत हो गई. घटना से गुस्साए लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की व हंगामा किया. नवादा के रजौली अनुमंडल स्थित अंबेडकर विद्यालय में धनारजय नदी का पानी घुस जाने से वहां मौजूद स्कूल के बच्चे एवं शिक्षक फंस गए. तकरीबन 100 की संख्या में बच्चे एवं शिक्षकों के फंसे होने की सूचना मिली तो स्थानीय लोगों ने प्रशासन की मदद से धीरे-धीरे वहां फंसे लोगों को रस्सी के सहारे से निकाल लिया गया. बच्चों को पास के महसई स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में रखा जा रहा है.

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