पटना में बाढ़ के बाद अब महामारी की आशंका

राणा अवधूत कुमार, डिप्टी ब्यूरो चीफ, आईसीएन बिहार 

राजेंद्र नगर व कंकड़बाग मुहल्लों में जलजमाव से कई बीमारी की संभावना
पटना सहित राज्य के 12 जिलों में अभी भी बाढ़ में फंसे हैं 30 लाख लोग
पटना। बिहार में भारी बारिश के बाद जलजमाव और बाढ़ की वजह से नारकीय जीवन जी रहे लोगों को अभी राहत नहीं मिल पा रही है। पीडि़तों को राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन भले ही पूरी ताकत से लगा हो, लेकिन तीन दिन बाद भी स्थितियां जस की तस बनी हुई हैं। सबसे बुरी स्थिति भागलपुर और पटना की है। भागलपुर के 265 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। पटना नगर के जल-जमाव वाले इलाकों में तो अब महामारी का खतरा मंडराता दिख रहा है। पांच दिनों के बाद भी पटना के कई इलाकों में पांच-पांच फीट पानी बह रहा है। बिहार में अब तक 73 लोगों की मौत हो गई है। वहीं गुरुवार और शुक्रवार के लिए एक बार फिर मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसे लेकर पटना के लोगों की धड़कनें फिर बढ़ गई हैं। खास बात कि सारण में बाढ़ के पानी में मगरमच्‍छ दिखा।
भारी बारिश, बाढ़ व जल-जमाव की आपदा की चपेट में बिहार के 97 प्रखंडों के 786 गांवों की 17.09 लाख आबादी आई है। पटना, भागलपुर, भोजपुर, नवादा, नालंदा, खगडिय़ा, समस्तीपुर, लखीसराय, बेगूसराय, वैशाली, बक्सर, कटिहार, जहानाबाद, अरवल और दरभंगा मुख्य रूप से प्रभावित हुए हैं। अभी भी दरभंगा-समस्‍तीपुर के बीच रेल परिचालन शुरू नहीं हुआ है। इससे मधुबनी व दरभंगा के लोग ट्रेनों के माध्‍यम से पटना आने से वंचित हैं।
पांच दिन बाद भी पटना के राजेंद्रनगर और आसपास के इलाकों में पांच फीट पानी जमा है। बड़े-बड़े पंप लगाने के बाद कुछ इलाकों का पानी घट रहा लेकिन राजेंद्रनगर में स्थिति बदतर होती जा रही। शहरी इलाके बहादुरपुर में पानी में डूबकर एक युवक की मौत हो गई जबकि राजेंद्रनगर में रेस्क्यू टीम ने घर से वृद्ध महिला को मृत हालत में निकाला। मोहल्लों में वृद्ध और लाचार लोग किस हालत में हैं, इसका पता तो तब ही चल पाएगा, जब पानी पूरी तरह से निकलेगा।
जिला प्रशासन राहत और बचाव कार्य चला रहा है लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोग इसकी पहुंच से बाहर हैं। गुवाहाटी से भी एनडीआरएफ की चार टीम को बिहार में प्रतिनियुक्त किया गया है। उधर, पुनपुन नदी का जलस्तर लगातार खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। जलस्तर 53.46 मीटर है, जो खतरे के निशान से ढाई मीटर अधिक है। बुधवार को पुनपुन का ङ्क्षरग बांध तीन जगह और टूट गया जिससे मुख्य बाजार में पानी घुस गया। जलजमाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों और कोचिंगों को दुर्गापूजा तक बंद करने का निर्देश दिया है। प्रशासन का दावा है कि पुनपुन पर बना मुख्य बांध सुरक्षित है जिससे पटना पर बाढ़ का खतरा नहीं है।
सड़ रहा पानी, बदबू से लोग परेशान, बीमारी की आशंका
पटना के शहरी इलाके राजेंद्रनगर, बाजार समिति और सैदपुर के कई इलाकों में पांचवें दिन भी पांच फीट तक पानी जमा है। पानी सडऩे लगा है। बदबू से लोग परेशान हैं। अब बीमारियों का खतरा भी लोगों को परेशान करने लगा है। बारिश पटना नगर निगम की 75 टीमों को फॉगिंग और ब्लीचिंग के छिड़काव के काम में लगाया गया है। जल जमाव वाले क्षेत्रों में पूजा पंडालों में भी चिकित्सा शिविर लगाए जा रहे हैं। 60 घंटे में निकल पाया पाया दो से ढाई फीट पानी। करीब एक सप्ताह होने को हैं, मगर शहरी इलाकों में पानी अधिकतम दो से ढाई फीट ही निकल सका है। पाटलिपुत्र कॉलोनी और राजीवनगर में भी तीन से चार फीट तक पानी है। यह हाल तब है, जब राज्य सरकार ने झारखंड और छत्तीसगढ़ से आधा दर्जन से अधिक मशीनें मंगाई हैं। प्रशासन का दावा है कि इन पंपों की मदद से एक मिनट में एक हजार गैलन पानी निकाला जा रहा है।
बिहार के 13 जिलों में पानी का कहर बरपाने के बाद राज्य की प्रमुख नदियों का जलस्तर घटने लगा है। लोग अपने उजड़े गांव-घर की ओर लौटने लगे हैं। कई गांवों के बाढ़ पीड़ित हालांकि अभी भी राहत शिविरों में सामुदायिक रसोई के सहारे दिन गुजारने को विवश हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी निकल जाने के बाद अब लोगों को बीमारियों का डर सताने लगा है। चिकित्सकों का भी मानना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारियों की आशंका बनी रहती है। स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग बीमारियों के प्रकोप से निपटने की तैयारी में जुट गए हैं।
पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) के चिकित्सक डॉ़ सुधीर कुमार ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी उतरने के बाद बीमारियों की आशंका बनी रहती है। बाढ़ग्रस्त इलाकों में सफाई व स्वच्छता के अभाव में हैजा, दस्त फैलने और विभिन्न संक्रामक रोगों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है। इस समय स्वच्छ, उबला हुआ पानी पीकर बीमार होने से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा, बाढ़ से उबरे क्षेत्रों में गैस्ट्रोइंट्रोटाइटिस, मलेरिया, टाइफाइड, डायरिया, नेत्र और चर्मरोग जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।
पटना के जाने माने चर्मरोग विशेषज्ञ डॉ. रवि विक्रम सिंह ने आईएएनएस से कहा कि बाढ़ के दौरान गंदले पानी में बैक्टीरिया पैदा होते हैं, जिस कारण लोगों को कई प्रकार के त्वचा रोग हो जाते हैं। उन्होंने पानी को उबालकर पीने की सलाह दी है और कहा कि लोग शरीर में आवश्यक खनिज आपूर्ति के लिए नारियल पानी या स्वच्छ पानी का उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा, कई स्थानों पर लोग भूजल पर निर्भर होते हैं, वे जीवाणु संक्रमण से छुटकारा पाने के लिए पानी में क्लोरीन मिला सकते हैं।
राज्य के कई क्षेत्रों से बाढ़ का पानी निकल गया है, जबकि कई क्षेत्रों से पानी का धीरे-धीरे निकलना जारी है। कई क्षेत्रों में सड़क ही शौचालय बन चुके हैं, जिससे बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ प्रभावित कई गांव ऐसे हैं, जहां लोगों को अभी भी दूषित पानी व कीचड़ से होकर घर तक जाना पड़ता है। राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी का दावा है कि राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ब्लीचिंग पाउडर, बैमेक्सिन, चूना और जरूरी दवाएं स्टॉक की गई हैं।
आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री लक्ष्मेश्वर राय कहते हैं कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा दलों को तैनात रखा गया है। इसके अलावा पशु शिविरों की भी स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद यदि किसी गांव में बीमारी से अधिक लोग पीड़ित हो रहे हैं, तो तत्काल इसकी सूचना सिविल सर्जन को देने की अपील की गई है, ताकि चिकित्सकों की टीम वहां समय पर भेजी जा सके।
हाल में आई बाढ़ से राज्य के 13 जिलों- शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, पूवीर् चंपारण, मधुबनी, दरभंगा, सहरसा, सुपौल, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार और पश्चिमी चंपारण जिले प्रभवित हैं। बाढ़ से अब तक 13० लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 88 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।

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