क्या आप सचमुच नागरिक हैं?

डॉ. श्रीश पाठक वे कहते हैं पॉलिटिक्स वाहियात चीज है, दूर ही रहें तो बेहतर। मै कहता हूँ कि यह राजनीतिक अशिक्षा की स्थिति है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को पॉलिटिकल लिटरेसी की जरूरत है। वे भड़क पड़ते हैं। कहते हैं, किताबों से क्या होता है, ये अरस्तू, प्लेटो आज क्या कर लेंगे, मुझे भान है कि यूपी में क्या हो रहा, केरल, तमिलनाडु, बंगाल में क्या हो रहा और जो हो रहा वो कोई किताब पढ़कर नहीं हो रहा। मैंने उनसे कहा कि चश्में और आँख का फर्क…

Read More

मानवता………

अकृति विज्ञा ‘ अर्पण, हमारे जीवन के उद्देश्य मार्ग के साथ चलती साधना।  गोरखपुर। आज के समय में आधुनिकता के जिस दौर में हम जी रहे हैं वहां मरती संवेदनायें बार बार एक ही दिशा में  हमारा ध्यान ले जाना चाहती हैं वो दिशा है मानवता। यदि हम भारतीय वैदिक मंथन को समझें तो मानवता एक महत्वपूर्ण  और विशेष अविमिय औचित्य है जिसके चार अंग विश्लेषण  ,संस्कार,वेदना व संज्ञा हैं जिनका प्रत्यक्ष सम्बंध मानवता से है या यूं कहें कि ये मानवता के अंग हैं। भारत द्वारा विश्व को दिये…

Read More

हाउडी मोदी कार्यक्रम से दुनिया भर में बढ़ी भारत की साख

राणा अवधूत कुमार, डिप्टी ब्यूरो चीफ, आईसीएन बिहार  पटना। अमेरिका के ह्यूस्टन में रविवार की रात भारत और अमेरिकी नागरिकों के समूह द्वारा आयोजित हाउडी मोदी कार्यक्रम से दुनिया भर में भारत की साख बढ़ी है। अमेरिका के टैक्सास राज्य के ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री के साथ मंच को साझा कर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मोदी के साथ अपने मजबूत रिश्तों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया। मोदी कहते भी रहे हैं कि ट्रंप से उनके सिर्फ राजनैतिक ही नहीं बल्कि नियर-डियर संबंध हैं। अमेरिका में हुए इस कार्यक्रम…

Read More

क्या हिंदी राष्ट्र भाषा है ?

सत्येन्द्र कुमार सिंह, एडीटर-ICN UP 26 जनवरी 1950 को भारत का अपना संविधान बना तब यह माना गया कि धीरे-धीरे हिंदी अंग्रेजी का स्थान ले लेगी और अंग्रेजी पर हिन्दी का प्रभुत्व होगा किन्तु कानून के अनेक मूल भावनाओं की तरह यह भी अपना उचित स्थान नहीं प्राप्त कर सका है| ये प्रश्न बड़ा अटपटा लग सकता है कि देश की सबसे ज्यादा बोले जानी वाली भाषा हिंदी (४१%-जनगणना २००१) भारत की राष्ट्रभाषा तो है ही नहीं| जी हाँ, यह सच है| गुजरात उच्च न्यायालय ने सन २०१० में यह स्वीकारते हुए…

Read More

हॉन्ग कॉन्ग का हंगामा

हॉन्ग कॉन्ग में कोई दो महीने से लाखों लोग सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने हॉन्ग कॉन्ग हवाई अड्डे पर विमानों का परिचालन ठप कर दिया जिससे दुनिया भर में सनसनी फैल गई। हॉन्ग कॉन्ग में हंगामे की जड़ में है प्रत्यर्पण विधेयक, जिसमें प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति चीन में अपराध करके हॉन्ग कॉन्ग में शरण लेता है तो उसे जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए चीन भेज दिया जाएगा। यह बिल पास हुआ तो चीन को उन क्षेत्रों में भी संदिग्धों को…

Read More

पाकिस्तान की हताशा

भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने और दो केंद्र शासित प्रदेश बनाये जाने से पाकिस्तान को काठ मार गया लगता है। दरअसल, घटनाक्रम इतना गोपनीय रहा कि उसकी खुफिया एजेंसियों तक को भनक नहीं लगी। दशकों से जनता को कश्मीर मुद्दे पर उद्वेलित करने के कारण पाक हुक्मरानों व सेना पर लोगों का भारी दबाव है। दूसरे राजनीतिक दल व कट्टरपंथी संगठन लोगों को इसके खिलाफ लामबंद कर रहे हैं। पाक से मामला न निगलते बनता है और न उगलते। दो दिन की ऊहापोह के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की…

Read More

यह कैसा विकास

संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन संबंधी अंतर-सरकारी समिति (आईपीसीसी) ने बृहस्पतिवार को जलवायु परिवर्तन और भूमि संबंधी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया को घेर रही इस स्थायी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए जीवाश्म-ईंधन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को रोकना ही काफी नहीं है। खेती में बदलाव करने होंगे, शाकाहार को बढ़ावा देना होगा और जमीन का इस्तेमाल सोच-समझकर करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार विश्व में 23 फीसदी कृषियोग्य भूमि का क्षरण हो चुका है, जबकि भारत में यह हादसा 30 फीसदी भूमि के साथ हुआ है।…

Read More

आईये, बुरा मानते हैं …..

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप    ‘बुरा मानने’ के हमारे सामाजिक अधिकार हमें पूरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ वापस मुहैया करा दिये गये हैं । आप चाहें तो अपने इन अधिकारों की विश्वसनीयता, वैधता एवं मारक क्षमता की जांच हेतु अब बड़े आराम से बुरा मान सकते हैं । लेकिन प्रश्न आज भी उतना ही बड़ा है जो अपनी उसी पूरी खिसियाहट के साथ तन के खड़ा है कि आप बुरा मान भी  जायेंगे तो कर क्या लेंगे? जिस प्रकार आनंदित रहना एक कला है, बुरा मानना भी एक…

Read More

सब कुछ याद रखा।

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  आज मैंने सोच रखा था, कुछ नहीं भूलूगां आज – कुछ भी नहीं। अपने रूमाल में गांठ बांधकर रखी थी ताकि जितने बार जेब में मेरा हाथ जाये, रूमाल की गांठ मुझे मेरे संकल्प की याद दिलाती रहे। यह विधि बचपन में मुझे मेरी दादी ने बताई थी। मैंने सोच रखा था, शारीरिक- मानसिक -तकनीकी जितनी भी विधियाँ संभव है- मैं सबका सहारा लूगां लेकिन कुछ भी नहीं भूलूगां आज।कल रात में ही छोटी बेटी ने कह रखा था कि सवेरे उसके स्कूल में…

Read More

भाषा बनाम संस्कृति और संस्कार

डॉ. संजय श्रीवास्तव मैं आप सभी से सिर्फ एक ही बात पूछना चाहता हूँ कि क्या भाषा किसी संस्कृति के निर्माण करने में सहायक होती है ? मेरा मानना है कि वैसे तो एक संस्कृति के निर्माण में कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है किन्तु किसी भी संस्कृति को दर्शाने में सबसे ज्यादा महत्त्व विचारों और भाषा का होता है | हमारे संस्कार हमारे विचारों का एक आइना होते हैं जो ये दर्शाते हैं कि जो भी विचार हमारे मन मस्तिष्क में चल रहे होते हैं वो हमारे क्रिया कलापों…

Read More