क्या प्रधानमंत्री से यह अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए कि वह एक निष्पक्ष न्यायमूर्ति बनाए

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर। हमारी सरकार ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए न्यायिक सेवा आयोग बनाने का प्रयास किया। माननीय सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय उसके विरुद्ध आया। हमने उस निर्णय को स्वीकार किया। हम उसे स्वीकार करते हैं और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं। लेकिन जिस तर्क के साथ सरकार के इस प्रस्ताव को अस्वीकार किया गया उस पर मुझे गंभीर आपत्ति है। सर्वोच्च न्यायालय का तर्क यह था कि इस आयोग में कानून मंत्री शामिल होगा और ऐसी स्थिति में यदि सरकार के खिलाफ कोई मुकदमा आता है और उसकी…

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एक औघड़ लीक से बिल्कुल हटकर….

राणा अवधूत कुमार, डिप्टी ब्यूरो चीफ, आईसीएन बिहार  क्या आपने कोई ऐसा औघड़ देखा है, जो सामाजिक कुरूतियों से लड़ते हुए जनता के बीच व्याप्त अंधविश्वासों से लड़ने के लिए तत्पर रहता हो? जो कुष्ठ रोगियों की स्वयं सेवा करता हो। अहम बात कि अपने पास आने वाले भक्तों, शिष्यों व आमलोगों को जप-ध्यान करने की नहीं बल्कि इस देश की समस्याओं की ओर ध्यान देने की प्रेरणा देता हो? वाराणसी के पूर्व गंगा तट पर पड़ाव पर रहने वाले अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम अपने अतीत व अपनी साधना में…

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मुम्बई के सितारों ने सजाई एक यादगार शाम । लफ़्ज़ों से परे में बिखेरे गये जज्बात-ए-क़लम..

मुम्बई। मुम्बई में स्थित शकुंतलम् स्टूडियों में “लफ़्ज़ों से परे” की ओर से कार्यक्रम “जज़्बात-ए-क़लम” का  आयोजन किया गया । कार्यक्रम में सभी ने बढ़-चढ के हिस्सा लिया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदी सिनेमा जगत के जाने माने राइटर “श्री जगमोहन कपूर” रहे। मशहूर शायर ग़ज़लकार “डॉ. वसिफ़ यार” एवं वरिष्ठ पत्रकार, कवि व फिल्म निर्माता श्री “संजय अमान जी भी उपस्थित रहे।कार्यक्रम में मोहब्बत और बगावत से लबालब भरी कविताओं से कवियों ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया । कार्यक्रम में  “श्री प्रमोद कुमार कुश “तन्हा” ,यूसुफ़ राना, श्याम्…

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पटना में बाढ़ के बाद अब महामारी की आशंका

राणा अवधूत कुमार, डिप्टी ब्यूरो चीफ, आईसीएन बिहार  राजेंद्र नगर व कंकड़बाग मुहल्लों में जलजमाव से कई बीमारी की संभावना पटना सहित राज्य के 12 जिलों में अभी भी बाढ़ में फंसे हैं 30 लाख लोग पटना। बिहार में भारी बारिश के बाद जलजमाव और बाढ़ की वजह से नारकीय जीवन जी रहे लोगों को अभी राहत नहीं मिल पा रही है। पीडि़तों को राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन भले ही पूरी ताकत से लगा हो, लेकिन तीन दिन बाद भी स्थितियां जस की तस बनी हुई हैं। सबसे बुरी…

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क्या आप सचमुच नागरिक हैं?

डॉ. श्रीश पाठक वे कहते हैं पॉलिटिक्स वाहियात चीज है, दूर ही रहें तो बेहतर। मै कहता हूँ कि यह राजनीतिक अशिक्षा की स्थिति है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को पॉलिटिकल लिटरेसी की जरूरत है। वे भड़क पड़ते हैं। कहते हैं, किताबों से क्या होता है, ये अरस्तू, प्लेटो आज क्या कर लेंगे, मुझे भान है कि यूपी में क्या हो रहा, केरल, तमिलनाडु, बंगाल में क्या हो रहा और जो हो रहा वो कोई किताब पढ़कर नहीं हो रहा। मैंने उनसे कहा कि चश्में और आँख का फर्क…

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मानवता………

अकृति विज्ञा ‘ अर्पण, हमारे जीवन के उद्देश्य मार्ग के साथ चलती साधना।  गोरखपुर। आज के समय में आधुनिकता के जिस दौर में हम जी रहे हैं वहां मरती संवेदनायें बार बार एक ही दिशा में  हमारा ध्यान ले जाना चाहती हैं वो दिशा है मानवता। यदि हम भारतीय वैदिक मंथन को समझें तो मानवता एक महत्वपूर्ण  और विशेष अविमिय औचित्य है जिसके चार अंग विश्लेषण  ,संस्कार,वेदना व संज्ञा हैं जिनका प्रत्यक्ष सम्बंध मानवता से है या यूं कहें कि ये मानवता के अंग हैं। भारत द्वारा विश्व को दिये…

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय की योजना के तहत प्रतिकुलपति प्रो. अनिल कुमार राय जाएंगे सिंगापुर

शिक्षाविद नेतृत्व कार्यक्रम के तहत बीएचयू व नन्यांग टेक्नॉलॉजिकल विवि, सिंगापुर में होगा प्रशिक्षण शैक्षणिक संस्थानों में अग्रणी नेतृत्व प्रदान करने की योग्यता का होगा विकास कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने जताई प्रसन्नता, कहा- विवि के विकास में मिलेगी मदद मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार की प्रतिष्ठित कार्य योजना ‘शिक्षाविद नेतृत्व कार्यक्रम-लीप’ के तहत विशेष प्रशिक्षण के लिए महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय का चयन किया गया है। लीडरशीप फॉर एकेडमिशियन प्रोग्राम में सहभागिता करने के लिए प्रो. राय 6 अक्टूबर 2019…

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क्या हिंदी राष्ट्र भाषा है ?

सत्येन्द्र कुमार सिंह, एडीटर-ICN UP 26 जनवरी 1950 को भारत का अपना संविधान बना तब यह माना गया कि धीरे-धीरे हिंदी अंग्रेजी का स्थान ले लेगी और अंग्रेजी पर हिन्दी का प्रभुत्व होगा किन्तु कानून के अनेक मूल भावनाओं की तरह यह भी अपना उचित स्थान नहीं प्राप्त कर सका है| ये प्रश्न बड़ा अटपटा लग सकता है कि देश की सबसे ज्यादा बोले जानी वाली भाषा हिंदी (४१%-जनगणना २००१) भारत की राष्ट्रभाषा तो है ही नहीं| जी हाँ, यह सच है| गुजरात उच्च न्यायालय ने सन २०१० में यह स्वीकारते हुए…

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मूल पत्राचार में हिन्दी का प्रयोग शत-प्रतिशत तक बढ़ाएंगे

जैसी मूल भावना के साथ नाथपा झाकड़ी हाइड्रो पावर स्टेशन में 14 से 28 सितम्बर हिन्दी पखवाड़ा प्रारम्भ झाकड़ी: 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा द्वारा हिन्दी को संघ की राजभाषा के रूप में मान्यता प्रदान की गई थी । इसलिए  प्रतिवर्ष 14 सितम्बर “हिन्दी-दिवस” के रूप में मनाया जाता है । यह भी सर्वविदित है कि राष्ट्र के नव-निर्माण में हिन्दी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है । आज़ादी के बाद 14 सितम्बर 1949 को जब संविधान सभा ने हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया, तो इसका संवैधानिक व प्रशासनिक…

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लोकतंत्र और लोकशक्ति

सुरेश ठाकुर “लोकतंत्र सबसे निकृष्ट शासन पद्दति है” | ये कथन करते समय विंस्टन चर्चिल के मष्तिष्क में शासक और प्रजा के अंतर्सम्बंधों का विसंगतियों से परिपूर्ण दृश्य अवश्य विद्यमान होगा | शासक और शासित के बीच के अन्तर को संकीर्ण करती इस पद्दति को मैं श्रेष्ठतर मानता हूँ | किंतु इस के साथ एक बड़ी शर्त भी लागू है | शर्त है लोक शक्ति का विवेकशील होना | एक ऐसी व्यवस्था जहाँ प्रजा स्वयं परोक्षतयः शासक होती हो वहाँ उस में एक शासक की दृष्टि होना अति आवश्यक है…

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